Social worker kaise bane/How to become a social worker?

Social worker kaise bane

Social worker kaise bane:- दिनों-दिन कई तरह की सामाजिक समस्याएं (Social Problem) बढ़ रही हैं और उन्हें दूर करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस वजह से सोशल वर्क (Social work) का दायरा बढ़ा है और यहां ट्रेंड लोगों की डिमांड भी बढ़ने लगी है। ऐसे स्टुडेंट की रुचि सोशल वर्क में है, उनके लिए काफी अच्छे अवसर हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता (social worker) सामाजिक कार्यों के लिए एक और किसी स्वयंसेवी संस्था के साथ या कंपनियों द्वारा चलाए जा रहे। किसी अभियान का हिस्सा भी बन सकते हैं। समाज में किसी भी समस्याओं को लेकर किया किसी स्वयंसेवी संस्था से जुड़कर अपनी सेवाएं दे सकते हैं। आज के इस लेख में Social worker kaise bane इस संबध में खास जानकारी दे रहें है।

Social worker kaise bane

आजकल युवाओं का रुझान इस तरफ ज्यादा ही हो रहा है। कुछ युवा मल्टीनेशनल कंपनी में अपनी जॉब छोड़ कर समाज सेवा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। क्योंकि मानव सेवा का सबसे बड़ा धर्म है। अपनी आत्म संतुष्टि के लिए युवा अपनी विदेश में जॉब छोड़कर देश में समाज के लिए सोशल वर्कर बन रहे हैं। पिछले दिनों से युवाओं का रुझान सोशल वर्क की तरफ बढ़ रहा है जो उनके अंदर देश के लिए विकास में भागीदार बनने का जज्बा है।

How to make career in Social worker

सोशल वर्क की फील्ड में काम करने के लिए किसी खास डिग्री की जरूरत नहीं होती है, लेकिन सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए होम साइंस, साइकोलॉजी, सोशियोलॉजी या सोशल साइंस में ग्रेजुएशन के बाद सोशल वेलफेयर, सोशल साइंस में मास्टर्स करना अच्छा रहेगा।

भारत में कई इंस्टीट्यूट्स, यूनिवर्सिटीज में इससे संबंधित कोर्स संचालित किए जाते हैं। जहां एंट्रेंस टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर दाखिला मिलता है। इसके अलावा, एनजीओ मैनेजमेंट का कोर्स भी कर सकते हैं। देश में कई इंस्टीट्यूट्स और यूनिवर्सिटी में एनजीओ मैनेजमेंट से जुड़े कोर्स शुरू हो चुके हैं। इन कोर्स को करके आप  social worker kaise bane बन सकते हो।

सोशल वर्कर के लिए कितनी होनी चाहिए योग्यता?

सोशल वर्कर बनने के लिए जरूरी है कि कैंडिडेट किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट होने के साथ-साथ सोशल वर्क / साइकोलॉजी / काउंसलिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त हो. इनके अतिरिक्त निम्नलिखित योग्यताएं रखनमे वाले उम्मीदवारों को सोशल वर्कर के पद पर चयन के लिए वरीयता दी जाती है-

महिला/बाल विकास या स्वास्थ्य या पर्यावरण आदि, जिस किसी भी क्षेत्र में वेकेंसी हो, उस क्षेत्र विशेष से संबंधित स्पेशियलाइज्ड डिप्लोमा या सर्टिफिकेट प्राप्त होना चाहिए।
कंप्यूटर पर कार्य करने में निपुणता।
जिस क्षेत्र में नियुक्ति हो वहां की स्थानीय भाषा का ज्ञान।
लिखने और रिपोर्ट बनाने पारंगत होना चाहिए। और इससे संबधित काम निपुण होना चाहिए।

Work Profile

सोशल वर्क की फील्ड में भी अब स्पेशलाइज्ड लोगों की डिमांड बढ़ने लगी है। चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक सोशल वर्क, अपराधियों को सुधारने पर आधारित समाज कार्य ये हैं।

शहरी और ग्रामीण समुदाय विकास से जुड़े मानव कल्याण के कार्य परिवार और बाल विकास, पुनर्वास, मानव अधिकार और सामाजिक कर्त्तव्य, प्राकृतिक आपदा में बचाव संबंधित कार्य, नशे की लत से मुक्तिदिलाने पर आधारित कार्य अशिक्षा दूर करने से जुड़े काम, घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के सशक्तिकरण पर आधारित कार्य, मानसिक और शारीरिक तौर पर विकलांग लोगों के पुनर्वास से संबंधित समाज कार्य में स्पेशलाइज्ड लोगों की जरूरत होती है।

इसके अलावा, स्टूडेंट्स सोशल सर्विस वर्कर, सोशल ग्रुप वर्कर, स्कूल काउंसलर, रिसर्च एनालिस्ट, साइकोलॉजिकल सोशल वर्कर, मेडिकल सोशल वर्कर, इंडस्ट्रियल सोशल वर्कर, फैमिली काउंसलर, चाइल्ड वेलफेयर वर्कर और इंटरनेशनल सोशल वर्कर के रूप में भी कार्य कर सकते हैं।

career scope

जिस तरह से आज हमारे समाज में अनेक प्रकार की समस्याएं हैं। जैसे किसी को बुढ़ापा मे परेशानी का सामना, मानसिक अवसाद, नशे की लत, बेरोजगारी, बढ़ रही है। इसलिए बेहतर अवसर के संकेत है अपना केरियर बनाने के लिए इस सेक्टर में काम के लिए आपको आर्थिक पहलुओं, पारिवारिक समस्य को समझना होगा इसके लिए आपको सेमिनार कॉन्फ्रेंस जागरूकता कार्यक्रम और अन्य तरह से उपलब्ध संसाधन का प्रयोग कर सकते हैं। उन पर काम करना होता है इसकी आवश्यकता समाज सेवा में किसी भी डिग्री की जरूरत अधिक मायने रखती है।

गांव व शहर में बढ़ती समस्याओं को लेकर जागरूकता अभियान, साक्षरता पर जोर एवं स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति गंभीर नजरिया विकसित होने से क्षेत्र में रोजगार की संभावना बढ़ी है। आप ग्रामीण विकास विभाग, सरकारी एजेंसियों, एनजीओ के अलावा इंडस्ट्रियल एवं कमर्शियल यूनिट और कॉर्पोरेट हाउसेस में सोशल साइंसेस प्रोफेशनल के लिए अवसर बड़े हैं।

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इसके अलावा यूनिसेफ, यूनेस्को, रेडक्रास, ऑक्सफेम, जैसे अंतरराष्ट्रीय सगठनो से जुड़ कर अपनी सेवाएं दे सकते है। वहां पर अवसर हमेशा मौजूद रहते हैं। फेलोशिप अनुभव का फायदा उठाया जा सकता है। जिसमें आपको निम्न स्तर से सीखने को मिलता है इस तरह के क्षेत्र में जाने के लिए काफी मायने रखती है यंग इंडिया फ़ेलोशिप, गांधी फेलोशिप, शहरी क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्र में उनकी समस्याओं को समझने का मौका मिलता है।

इसके अलावा और ऐसी अनेक फेलोशिप है। जो इस क्षेत्र में काम करने के लिए अनेक युवाओं को शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का जरूरतों को समझने का मौका मिलता है और इसके साथ डेवलपमेंट स्किल भी होती है।

Top institute and university

  • टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई/Tata Institute of Social Sciences, Mumbai
  • दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली/Delhi University, Delhi
  • एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ एनजीओ मैनेजमेंट, नोएडा/Amity Institute of NGO Management, Noida
  • मदुरै कामराज विश्वविद्यालय, मदुरै तमिलनाडु/Madurai Kamaraj University, Madurai Tamil Nadu
  • अन्नामलाई विश्वविद्यालय, अन्नामलाई नगर, तमिलनाडु/Annamalai University, Annamalai Nagar, Tamil Nadu
  • लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ/Lucknow University, Lucknow
  • सेंटर ऑफ सोशल इनीशिएटिव एंड मैनेजमेंट, हैदराबाद/Center of Social Initiative and Management, Hyderabad
  • भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, गांधीनगर/Indian Institute of Entrepreneurship Development, Gandhinagar
  • जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, रांचीXavier Institute of Social Sciences, Ranchi
  • ग्रामीण प्रबंधन संस्थान, आणंद/Institute of Rural Management, Anand

 

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