Neuralink mind-reading chip: Elon Musk ने बंदर के दिमाग में लगाया ऐसा सुपर चिप, इंसानों पर जल्द होगा ट्रायल!

Neuralink mind-reading chip

Neuralink mind-reading chip:-दुनिया के इनोवेटिव शख्स Elon Musk अपने काम के लिए इंटरनेट पर छाए रहते है। दुनिया के अमीरों की लिस्ट शामिल इलॉन मस्क ऐसे काम कर रहें है कि लोगों की जुबां पर रहते है।Elon Musk ऐसे ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहें जो दुनिया को बदलने की चाहत रखते है। एलन मस्‍क कई कंपनियां के मालिक है।

इन दिनों एलन मस्‍क की स्पेस एक्स नहीं बल्कि उनके एक कंपनी न्यूरालिंक ने बड़ा कारनामा करके दिखाया है। आप को बता दें कि एलन मस्‍क की कंपनी न्‍यूरालिंक ने  बंदर पागेर (Pager) के कंप्‍यूटर पर वीडियो गेम खेलने का वीडियो जारी करके तहलका मचा दिया है।

न्यूरसाइन्स (Neuralink mind-reading chip) पर काम कर रही है कंपनी न्यूरालिंक का इस टेक्नॉलॉजी के पीछे का मकसद है कि  डिजिटल सुपरइंटेलिजेंस से इंसान कहीं हार न जाएं, इसलिए पहले तैयारी की जा रही है। कंपनी की माइंड रीडिंग चिप को लेकर दावा किया जा रहा है। कि ये चिप आगे चल कर इन्सानों के माइड में लगाई जाएगी।

 

  हाल ही में इलेक्ट्रिक कार मेकर कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने बतायाकि उनकी ह्यूमन कंप्यूटर इंटरफेस कंपनी, न्यूरालिंक (Neuralink) माइंड रीडिंग चिप बनाने जा रही है।  इस चिप की टेस्टिंग भी शुरू कर दी है। न्यूरालिंक ने एक बंदर के सिर में एक वायरलेस कंप्यूटर चिप लगाई गई है। जिसे छोटी-छोटी तारों के जरिए उसके दिमाग से जोड़ा गया है। जिसके बाद बंदर अपने दिमाग की मदद से वीडियो गेम खेल सकता है।

अब रिजल्ट के रुप में एलन मस्‍क ने अब इस बंदर के वीडियो गेम खेलने के वीडियो को शेयर किया है। बताया जा रहा है कि इस वीडियो को रेकॉर्ड करने से 6 सप्‍ताह पहले बंदर के अंदर न्‍यूरालिंक चिप को लगाया गया था। दोस्तों मस्क दुनिया के लिए ऐसा कर रहे है। कि इन्सानों के अस्तिव बना रहे । जिसमें एलन मस्‍क की मंगल पर इन्सानों को बसाने के योजना, इलेक्ट्रिक कार के जरिए कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना।

न्यूरालिंक कंपनी ने मांइड रिडिगं चिप बनाई है।  नाम के मंकी के मांइड में लगाई है वीडियो में देखा जा सकता है कि यहां पर बंद जॉयस्टिक के साथ ऑन-स्क्रीन गेम खेल रहा है। उसे ऐसा करना सिखाया गया था। वीडियो गेम में बंदर कलर बॉक्स जॉयस्टिक का इस्तेमाल करता देखा गया है। न्यूरालिंक ने मशीन लर्निंग से यह अंदाजा लगाया है। कि कलर बॉक्स को कहां ले जाएगा और उसके हाथ में हुई हलचल को उसने पहचान लिया।  फिर कंप्यूटर से जॉयस्टिक को डिस्कनेक्ट कर दिया गया। डिस्कनेक्ट होने के बाद भी बंदर नहीं रुका। वह अपने दिमाग से खेलता रहा।

 

न्‍यूरालिंक कंपनी ऐसे काम को कर रही है,जो इंसानी दिमाग और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को जोड़ने की कोशिश में जुटी हुई है इसका नाम दिया गया है  Neuralink जो मस्क की न्यूरल इंटरफेस टेक्नॉलजी कंपनी है। सबसे अच्छी बात यह है कि बताया जाता है कि  इस तकनीक से कई गंभीर बीमारियों के इलाज में भी कारगर साबित होगी।

न्यूरल इंटरफेस टेक्नॉलजी की मदद से एक इंसान के दिमाग में .चिप इंसर्ट कर दी जाएगी जो न सिर्फ दिमाग की ऐक्टिविटी को रिकॉर्ड करेगी, उस पर असर भी डाल सकेगी आप को ये तो यह हाई-टेक तरीका सुनने में अजीब या गैर-जरूरी भी लग सकता है लेकिन पारकिंसन्स जैसी बीमारी के इलाज में इसका इस्तेमाल काफी अहम साबित हो सकता है।  कंपनी के अनुसार इस डिवाइस का इस्तेमाल याददाश्त बढ़ाने, ब्रेन स्ट्रोक या अन्य न्यूरोलॉजिकल रोगों से ग्रस्त मरीजों में किया जाएगा। इसके अलावा,लकवाग्रस्त मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होगी। हम मरीज के दिमाग को पढ़ सकेंगे और डेटा एकत्रित कर सकेंगे।

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी का मानना है  कि डिजिटल सुपरइंटेलिजेंस से इंसान कहीं हार न जाएं, इसलिए पहले से इसकी तैयारी करनी चाहिए।. आप को बता दें कि उन्होंने एक पॉडकास्ट में बताया था कि हम कभी डिजिटल सुपरकंप्यूटर से ज्यादा स्मार्ट नहीं हो सकेंगे। इसलिए अगर हम उन्हें हरा नहीं सकते तो उनके साथ मिल जाना चाहिए।

Neuralink असल में क्या करेगी, इसे लेकर मस्क ने कई बड़े-बड़े संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि टीवी सीरीज ब्लैक मिरर की तरह वह यादें सेव करके दोबारा प्ले कर सकेगी या टेलिपैथी से कार बुला सकेगी।  इसके आलावा पैरैलेसिस या दिव्यांगता के साथ जी रहे लोगों के लिए भी मददगार साबित हो सकती है। हालाकि इन दावों को सच मानना एक्सपर्ट्स के लिए फिलहाल मुश्किल है।

ऐसे में इन एक्सपर्ट्स का अलग राय है यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूकासल के न्यूरोसाइंटिस्ट प्रफेसर ऐंड्रू जैकसन ने बताया था कि यह तकनीक मुमकिन हो सकती है। लेकिन उसके पीछे न्यूरोसाइंस ठोस नहीं है। वहीं, ऐंड्रू हायर्स ने इस आइडिया को मस्क की काल्पनिक दुनिया बताया है।  ऐसे में उनकी ये अलग राय है ।

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