Election analyst kaise bane/How to become election analyst?

Election analyst kaise bane

Election analyst kaise bane:- जब भी किसी इलेक्शन के रिजल्ट आते है, तो लोग टीवी, सोशल मीडिया पर जैसे चिपक ही जाते है, विभिन्न चैनल के द्वारा लोग इलेक्शन एनालिस्ट को सुनते है। क्या आप को भी इलेक्शन एनालिस्ट करना पंसद है, क्या इलेक्शन एनालिस्ट में काम में प्रयोग लाई जानी वाली प्राणाली में काम रुचि रखते है। तो यह करियर ऑप्सन आप के लिए अच्छा साबित हो सकता है।

Election analyst kaise bane

इस लेख में आप को इलेक्शन एनालिस्ट कैसे बनें (Election analyst kaise bane) इसके तहत what is election analyst, how to become a election analyst , election analyst education, election analyst course, election analyst career scope, election analyst salary आदि के बारे में जानकारी दे रहे है। फुल जानकारी के लिए इस लेख को लास्ट तक जरुर पढ़े।

Election analyst kaise bane

हमारा देश भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। देश में हर पंचवर्षीय पर लोकसभा और राज्य में विधानसभा को इलेक्शन होते है। इलेक्शन के रिजल्ट आने के समय इलेक्शन की सरगर्मियां जोर पकड़ लेती है। ऐसे में अगर आपको इन इलेक्शनों में एक इलेक्शन एनालिस्ट के तौर पर काम करना हो तो आप अपने काम और जिम्मेदारी को लेकर कुछ उत्साह और कुछ तनाव जरुर होगा क्योंकि यह जाहिर-सी बात है कि एक इलेक्शन एनालिस्ट के तौर पर (Election analyst kaise bane) आपकी जिम्मेदारी काफी अधिक होंगी।

ये है कुछ नामी इलेक्शन एनालिस्ट्स

सबसे पहले तो हम भारत के कुछ लोकप्रिय इलेक्शन एनालिस्ट्स के बारे में आप को जरुर जानना चाहिए। इन इलेक्शन एनालिस्ट्स के नाम कुछ इस तरह है जैसे, प्रन्नॉय रॉय, जीवीएल नरसिम्हा राव, योगेन्द्र यादव, और विनोद दुआ।

ये प्रोफेशनल्स लगातार कई वर्षों से इंडियन इलेक्शन्स के दौरान लोगों को जनता के रुझान की जानकारी देते हैं और अपने काम के जरिये इन्होनें भारत में अपनी विशेष पहचान कायम कर ली है। इलेक्शन एनालिस्ट्स से टीवी चैनल शुरुआत करने में प्रन्नॉय रॉय का नाम आता है, जो अब एनडीटीवी के को-फाउंडर हैं, इनको इंडियन सेफ़ोलॉजी का जनक माना जाता है। बताया जाता है कि, भारत में सेफ़ोलॉजी/ इलेक्शन एनालिसिस की शुरुआत प्रन्नॉय रॉय ने ही की थी।

अगर आप को इलेक्शन एनालिस्ट्स के तौर पर अपने आप को जोड़ना चाहते है तो इस फील्ड में करियर बना सकते है। जानकारी के लिए आप को बता दें कि यह काम को आप साइट के तौर पर भी कर सकते है, क्योंकि इलेक्शन ऐसी चीज है जो हर समय नहीं होती है जिससे पोलिटिकल एनालिस्ट्स के तौर पर काम कर सकते है।

आजकल टीवी और रेडियो के अलावा, विभिन्न सोशल मीडियाज में भी इलेक्शन एनालिसिस से जुड़े कार्यक्रम काफी पसंद किये जाते हैं। आपने एनालिस्ट्स से लोगों के बांध सकते है। अपना नाम कमा सकते है तो चलिए आइए जानते है इसमें कैसे करियर बनाए और इससे एक कामयाब इलेक्शन एनालिस्ट (Election analyst kaise bane) बनने के लिए जरुरी क्वालिफिकेशन्स और उनके करियर स्कोप संबधित जानकारी के बारे में…..

what is election analyst/ election analyst क्या है?

प्रोफेशनल्स को इस क्षेत्र में आंकड़ों और लोगों के नजरिए को परखना होता है। बतौर election analyst इसमें इनफ्रारमेशन एंड फैक्ट का जमकर दोहन किया जाता है। इलेक्शन के पहले से ही पूर्व के आंकड़ों को परखने (यानि की पहले संपन्न इलेक्शन के नतीजे), चुनाव के दौरान मत-प्रतिशत और फिर उसके बाद नफा-नुकसान, गठबंधन से फायदा आदि का विधिवत अध्ययन किया जाता है।

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 इलेक्शन एनालिसिस को इसके लिए फील्ड पर जाना पड़ता है जिससे लोगों के ओपिनियन, रुझान के बारे में पता चल सकें। इस तरह से काम के सिलसिले में प्रोफेशनल्स को चुनावी क्षेत्रों का दौरा भी करना पड़ता है। एक तरह से देखा जाए तो इनका काम एक धुंधली तस्वीर को झाड़-पोंछकर किसी खास निष्कर्ष तक ले जाना है।

एग्जिट पोल के नतीजों की सार्थकता को देखते हुए इनके काम की हर जगह पूछ है तथा लगभग सभी पार्टियां इनकी सेवाएं लेने में दिलचस्पी दर्शा रही हैं। यह काम देखने में चाहे भले ही आसान लग रहा हो लेकिन यह इतना आसान नहीं है। जिसके लिए इलेक्शन एनालिसिस के तौर पर दिनरात कढ़ी मेहनत करनी पड़ती है।

How to become a election analyst

Education qualification

दरअसल, इलेक्शन एनालिस्ट्स बनने /Election analyst kaise bane के लिए किसी खास कोर्स का संचालन नहीं किया जाता है। लेकिन पोस्ट ग्रेजुएशन में राजनीति शास्त्र, समाजशास्त्र अथवा सांख्यिकी की डिग्री रखने वाले छात्र इसके लिए उपयुक्त समझे जाते हैं। इस क्षेत्र की कार्यशैली व गंभीरता को देखते हुए इसमें पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स को ही सबसे अच्छा माना जाता है। यदि छात्र के पास राजनीति शास्त्र व समाजशास्त्र अथवा सांख्यिकी में से किसी एक में डॉक्टरेट की डिग्री है तो उन्हें वरीयता दी जाती है।

ऐसे में अगर फील्ड में जाने के आतुर है और 12वीं के परीक्षा को पासकर लिया है, तो इसके लिए किसी मान्यताप्राप्त एजुकेशन बोर्ड से आर्ट्स के विभिन्न विषयों – राजनीति विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र और भूगोल – सहित अपनी 12वीं क्लास पास करने वाले स्टूडेंट्स जिन्होंने राजीति से जुड़े निम्नलिखित विभिन्न विषयों में किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन/ पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर सकते है।

election analyst course

  •  बीए/ एमए – पोलिटिकल साइंस
  • बीए/ एमए – सोशियोलॉजी
  •  बीए/ एमए – स्टैटिस्टिक्स
  •  पीएचडी – पोलिटिकल साइंस

इसके अलावा आप इस फील्ड में जाने के लिए सर्टिफिकेट कोर्सेज भी कर सकते है।  पिछले कुछ वर्षों से हमारे देश की कुछ प्रमुख यूनिवर्सिटीज ने सेफ़ोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्सेज शुरू किये हैं ताकि इस पेशे में एक्सपर्ट्स की बेहतरीन टीमें तैयार हो सकें।

Election analyst career scope

करियर स्कोप की बात करें तो इसमें काम करने के लिए विस्तार फील्ड मिलता है। इसमें प्रोफेशनल्स को सरकारी व प्राइवेट दोनों जगह पर्याप्त अवसर मिलते हैं। यदि स्टुडेंट ने सफलतापूर्वक कोर्स किया है तो उसे रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए कि इलेक्शन सर्वे या रिसर्च कराने वाली एजेंसियों, टीवी चैनल, न्यूज मेंग्जीन, पॉलिटिकल पार्टी व एनजीओ आदि को पर्याप्त संख्या में इनकी जरूरत होती है। इसके अलावा पॉलिटिकल एडवाइजर, संसदीय कार्य तथा पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के अलावा में भी इनकी बेहद मांग है।

यदि प्रोफेशनल किसी संस्था अथवा बैनर से जुड़कर काम नहीं करना चाहता तो वह स्वतंत्र रूप से बतौर कंसल्टेंट अथवा अपनी एजेंसी खोलकर भी कार्य कर सकता है। दरअसल आज का दौर सोशल मीडिया का है। ऐसे में लोग ज्यादातर अपनी बातों को ऑडियंस तक पंहचाने के लिए इस माध्यम का सहारा लेते है।

सफल election analyst बनने के लिए क्या करें?

एक अच्छा election analyst (election analyst kaise bane) बनने के लिए यह आवश्यक है कि प्रोफेशनल्स जातिगत एवं मतों के धु्रवीकरण को बखूबी समझे, अन्यथा वह एक स्वस्थ व निर्विवाद निष्कर्ष पर कभी नहीं पहुंच सकता। इन प्रमुख गुणों के साथ-साथ उसे परिश्रमी व धैर्यवान भी बनना होगा।

उसके पास पिछले कुछ चुनावों के आंकड़े भी होने चाहिए। कंप्यूटर व इंटरनेट की जानकारी उसे कई तरह से लाभ पहुंचा सकती है। राजनीतिक आंकड़ों का ताना-बाना बुनने के साथ ही जनसांख्यिकी पैटर्न को गहराई से समझना जरूरी होता है। साथ ही उन्हें जातिगत समीकरणों व राजनीतिक हलचलों से खुद को अपडेट रखना पड़ता है।

 Salary

इसमें सैलरी की कोई निश्चित रूपरेखा नहीं होती। इसलिए कम सैलरी में शुरुआत हो सकती है। हालांकि चुनावी दिनों में स्पेशल प्रोजेक्ट के लिए एक मोटे पैकेज भी मिल सकता है।  जबकि प्रोफेसर व एनालिस्ट के रूप में वे 35-40 हजार रुपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं। यदि वे एनालिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं तो उनके लिए आमदनी के कई रास्ते होते हैं।

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